House of Himalayas: पहाड़ के खेत, हुनर और स्वाद को देश-दुनिया तक पहुंचाने की उत्तराखंड की बड़ी पहल
उत्तराखंड की पहचान सिर्फ ऊंचे पहाड़ों, खूबसूरत वादियों और चारधाम से नहीं है। इस पहाड़ की अपनी एक अलग रसोई है, अपना हुनर है और गांवों में आज भी ऐसे कई उत्पाद बनते हैं, जिनकी मांग देश के दूसरे हिस्सों में भी है।
पहाड़ का झंगोरा, मंडुवा, गहत, भट्ट, राजमा, लाल चावल, बुरांश, शहद, पहाड़ी मसाले और कई तरह के हस्तशिल्प लंबे समय से उत्तराखंड की पहचान रहे हैं। लेकिन असली चुनौती हमेशा यही रही कि इन स्थानीय उत्पादों को एक बड़ा और भरोसेमंद बाजार कैसे मिले?
इसी सोच के साथ उत्तराखंड सरकार ने ‘House of Himalayas’ नाम से एक ऐसा अम्ब्रेला ब्रांड तैयार किया, जिसका उद्देश्य पहाड़ के स्थानीय उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता और मार्केटिंग के साथ देश और विदेश के बाजार तक पहुंचाना है।
आखिर House of Himalayas है क्या?
सरल शब्दों में समझें तो House of Himalayas उत्तराखंड के अलग-अलग स्थानीय उत्पादों के लिए एक साझा ब्रांड है।
राज्य में पहले से कई विभागों और संस्थाओं के माध्यम से अलग-अलग नामों से उत्पाद तैयार और बेचे जाते रहे हैं। House of Himalayas का प्रयास इन उत्पादों को एक मजबूत पहचान के साथ बड़े बाजार तक ले जाना है।
यानी गांव में किसी महिला स्वयं सहायता समूह ने अचार, मसाला, दाल या कोई हस्तशिल्प बनाया तो उसकी बिक्री सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि उसे एक ऐसे ब्रांड के माध्यम से देश के दूसरे शहरों और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके।
शुरुआत कब हुई?
House of Himalayas को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 दिसंबर 2023 को देहरादून में आयोजित Global Investors Summit के दौरान लॉन्च किया था। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने इस ब्रांड को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए कंपनी और मार्केटिंग व्यवस्था तैयार करने पर काम शुरू किया।
इसके बाद House of Himalayas के लिए अलग कंपनी बनाई गई, ताकि खरीद, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और बिक्री जैसे काम बड़े स्तर पर किए जा सकें।
इसमें किसका फायदा होगा?
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ उत्पाद नहीं, बल्कि उस उत्पाद को बनाने वाले लोग हैं।
House of Himalayas के तहत स्वयं सहायता समूहों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों के उत्पादों को बाजार देने की कोशिश की जा रही है।
खास तौर पर पहाड़ की महिलाओं के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। गांवों में महिलाएं लंबे समय से खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसे कामों से जुड़ी हैं। अगर उनके उत्पाद को सही बाजार और बेहतर कीमत मिलती है तो इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आय पर पड़ सकता है।
आधिकारिक वेबसाइट भी House of Himalayas को हिमालयी महिलाओं और उनके समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका बनाने की पहल के रूप में प्रस्तुत करती है।
House of Himalayas में क्या-क्या मिलता है?
अगर आपको लगता है कि इसमें सिर्फ पहाड़ी दालें और अनाज ही मिलते होंगे, तो ऐसा नहीं है।
इसके उत्पादों की श्रेणी काफी बड़ी हो चुकी है। इसमें मिलेट्स, चावल, आटा, दालें, तेल और घी, नमक और मसाले, शहद, चाय-काढ़ा, बेकरी उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, पर्सनल केयर और हिमालयी वेलनेस उत्पाद शामिल हैं।
कुछ लोकप्रिय उत्पादों में पहाड़ी गहत दाल, पहाड़ी काला भट्ट, मुनस्यारी राजमा, रागी आटा, लाल चावल, बुरांश हर्बल इन्फ्यूजन, जंगली शहद, पहाड़ी काढ़ा और हिमालयन खुबानी तेल जैसे उत्पाद शामिल हैं।
यानी पहाड़ की पारंपरिक थाली से लेकर हस्तशिल्प तक, कोशिश यह है कि उत्तराखंड की अलग-अलग पहचान एक ही ब्रांड के जरिए लोगों तक पहुंचे।
ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं
House of Himalayas को सिर्फ दुकानों तक सीमित रखने के बजाय ऑनलाइन बाजार से भी जोड़ा गया है।
ब्रांड की अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट शुरू की गई है और इसके अलावा Amazon, JioMart, ONDC जैसे प्लेटफॉर्म से भी साझेदारी की गई है। कुछ उत्पादों को Blinkit और Zepto जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में भी काम किया गया है।
यानी अगर आप दिल्ली, मुंबई, नोएडा या देश के किसी दूसरे शहर में रहते हैं और पहाड़ का गहत, भट्ट, राजमा या बुरांश अपने घर तक मंगाना चाहते हैं, तो अब इसके लिए उत्तराखंड आने का इंतजार जरूरी नहीं है।
सिर्फ स्वाद नहीं, पहाड़ की कहानी भी
House of Himalayas की खास बात यह है कि यह सिर्फ सामान बेचने की कोशिश नहीं है।
हर स्थानीय उत्पाद के पीछे एक कहानी है।
गहत की दाल सिर्फ एक दाल नहीं है। यह पहाड़ की रसोई का हिस्सा है।
भट्ट सिर्फ एक अनाज नहीं, बल्कि कुमाऊं-गढ़वाल के पारंपरिक खानपान की पहचान है।
बुरांश सिर्फ जंगल में खिलने वाला फूल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति से जुड़ी पहचान है।
और जब इन्हीं उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बाजार में उतारा जाता है, तो उम्मीद यही रहती है कि पहाड़ की पुरानी पहचान नई पीढ़ी और नए बाजार तक भी पहुंचे।
लक्ष्य कितना बड़ा है?
उत्तराखंड सरकार ने House of Himalayas को राष्ट्रीय बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाने की योजना बनाई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार कंपनी ने 2027 तक 50 करोड़ रुपये की बिक्री का लक्ष्य रखा है। साथ ही अमेरिका और मध्य-पूर्व जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को ध्यान में रखते हुए Go-To-Market योजना पर भी काम किया जा रहा है।
ब्रांड की अपनी वेबसाइट पर भविष्य का लक्ष्य और भी बड़ा बताया गया है—2030 तक 5 लाख हिमालयी परिवारों और 50,000 स्वयं सहायता समूहों को इससे जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
क्या House of Himalayas पहाड़ से पलायन रोक पाएगा?
यह सवाल शायद सबसे महत्वपूर्ण है।
सिर्फ एक ब्रांड बनने से पहाड़ों से पलायन रुक जाएगा, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन अगर स्थानीय किसानों, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को उनके उत्पाद की अच्छी कीमत मिलने लगे, बाजार गांव के बाहर तक पहुंचने लगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें, तो इसका असर जरूर दिखाई दे सकता है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
House of Himalayas की असली सफलता भी शायद इसी बात से तय होगी कि इसकी बिक्री बढ़ने के साथ-साथ पहाड़ के गांव में रहने वाले किसान और महिला समूह की कमाई कितनी बढ़ती है।
आज House of Himalayas कहां खड़ा है?
ब्रांड ने लॉन्च के बाद से अपनी उत्पाद श्रेणी बढ़ाई है। उत्तराखंड सरकार के अनुसार शुरुआती 18 SKU से बढ़कर उत्पाद लाइन 31 SKU तक पहुंचाई गई थी और हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट तथा पर्सनल केयर जैसी नई श्रेणियां भी जोड़ी गईं।
2026 की शुरुआत में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार House of Himalayas की कुल बिक्री 3.7 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी थी और ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने की तैयारी भी चल रही थी।
यह आंकड़ा अभी बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन एक नए सरकारी ब्रांड के लिए यह संकेत जरूर है कि पहाड़ी उत्पादों के लिए बाजार मौजूद है।
पहाड़ के लिए उम्मीद की एक नई राह
उत्तराखंड के गांवों में आज भी बहुत कुछ ऐसा पैदा होता है जिसकी असली कीमत शायद गांव के बाहर जाकर ही समझ आती है।
जरूरत सिर्फ इतनी है कि उस उत्पाद को सही पहचान, सही पैकेजिंग, गुणवत्ता और सही बाजार मिले।
House of Himalayas इसी दिशा में एक कोशिश है—पहाड़ के खेत से निकली चीज सीधे देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचे और उसका फायदा उस किसान, महिला या कारीगर तक भी पहुंचे जिसने उसे तैयार किया है।
आने वाले वर्षों में इसकी असली परीक्षा यही होगी कि यह ब्रांड उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को कितनी बड़ी पहचान दिला पाता है और पहाड़ के लोगों की आमदनी में कितना बदलाव ला पाता है।
क्योंकि आखिरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ तभी सार्थक होगा, जब लोकल को सही कीमत और सही बाजार भी मिले।
— विनोद सिंह
Uttarakhand Darshan
House of Himalayas के उत्पाद और पूरी जानकारी इसकी पर देखी जा सकती है। ब्रांड का संपर्क कार्यालय अजीविका भवन, रायपुर, देहरादून में है।
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