🌾 'एक मंडी-एक गांव' योजना: उत्तराखंड के किसानों की तकदीर बदलने की नई पहल
प्रस्तावना
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती-किसानी हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। ऊबड़-खाबड़ भूगोल, छोटी जोत, और सबसे बड़ी समस्या — अपनी उपज को सही बाजार तक पहुंचाना। कई गांव मुख्य मंडियों से इतनी दूर हैं कि किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कौड़ियों के भाव स्थानीय बिचौलियों को बेचनी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने 'एक मंडी-एक गांव' योजना शुरू की है, जिसका मकसद है किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और गांव के आसपास ही एक सुव्यवस्थित बाजार खड़ा करना।इस ब्लॉग में हम इस योजना की पूरी जानकारी, इसके उद्देश्य, कार्यप्रणाली और किसानों को होने वाले फायदों को विस्तार से समझेंगे।
योजना क्या है?
उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के माध्यम से इस वर्ष जून में 'एक मंडी-एक गांव मॉडल ग्राम गोद योजना' शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत राज्य की सभी 23 कृषि उत्पादन मंडी समितियां एक-एक गांव को गोद लेकर उसे मॉडल कृषि विपणन ग्राम के रूप में विकसित करेंगी। हर चयनित गांव को तीन साल के लिए संबंधित मंडी समिति गोद लेगी और वहां स्थानीय उपज के अनुसार बाजार से जुड़ा पूरा ढांचा तैयार किया जाएगा।
योजना के मुख्य उद्देश्य
- किसानों को उनकी उपज का उचित और बेहतर मूल्य दिलाना
- गांव के आसपास ही भंडारण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना
- किसानों को दूर की मंडियों पर निर्भरता से मुक्त करना
- कृषि उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा देना
- जैविक खेती और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को प्रोत्साहित करना
योजना कैसे काम करेगी — स्टेप बाय स्टेप
प्रत्येक मंडी समिति अपने क्षेत्र में से एक गांव का चयन करेगी। चयन करते समय निम्न बातों को प्राथमिकता दी जाएगी:
- कृषि प्रधान गांव
- बेहतर फल व सब्जी उत्पादन वाले गांव
- जैविक खेती करने वाले क्षेत्र
- सक्रिय किसान उत्पादक संगठन (FPO) वाले गांव
- स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों से जुड़े गांव
- दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों के गांव
चयनित गांव को संबंधित मंडी समिति तीन वर्षों के लिए गोद लेगी और वहां विकास कार्य शुरू करेगी।
गांव में किसानों की सुविधा के लिए निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
- मिनी कलेक्शन सेंटर
- ग्रामीण हाट / मिनी मंडी
- इलेक्ट्रॉनिक कांटा (तौल की सुविधा)
- ग्रेडिंग और पैकेजिंग यूनिट
- कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड रूम
- गोदाम (वेयरहाउस)
- उपज ढुलाई के लिए परिवहन सहायता
चयनित गांव को एक वर्ष के लिए एक विशेष विकास पैकेज भी दिया जाएगा, ताकि वहां तेजी से आधारभूत ढांचा खड़ा हो सके।
किसानों को सिर्फ उपज बेचने की सुविधा ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्द्धन (वैल्यू एडिशन) के जरिए उनकी उपज की कीमत बढ़ाने में भी मदद की जाएगी।
किसानों को क्या फायदा होगा?
- अब किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर की मंडियों में नहीं जाना पड़ेगा
- फसल जल्दबाजी में कम दाम पर बेचने की मजबूरी खत्म होगी
- भंडारण की सुविधा मिलने से किसान सही समय पर उचित भाव पर उपज बेच सकेंगे
- गांव में ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
- गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और ग्रेडिंग से उत्पाद बाजार में बेहतर दाम पा सकेंगे
चुनौतियां और चुनौतियों से निपटने की तैयारी
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की सबसे बड़ी दिक्कत रही है बाजार तक पहुंच की कमी और भंडारण सुविधाओं का अभाव। यही वजह है कि किसान अपनी फसल जल्दी बेचने को मजबूर होते रहे हैं। इस योजना के जरिए सरकार सीधे इसी समस्या की जड़ पर काम कर रही है — गांव में ही वह पूरा ढांचा तैयार करके, जो अब तक सिर्फ बड़ी मंडियों में उपलब्ध था।
निष्कर्ष
'एक मंडी-एक गांव' योजना उत्तराखंड के पर्वतीय किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। अगर यह योजना जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू होती है, तो न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि गांवों में रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिलेगी। यह पहल उत्तराखंड सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनके तहत हर विकासखंड को कृषि और उद्यान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना कितने गांवों को वाकई में मॉडल कृषि विपणन ग्राम में बदल पाती है और किसानों की जिंदगी में कितना बदलाव लाती है।

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