गंगोलीहाट गुफाओं की रहस्यमयी घाटी (हाट कालिका व पाताल भुवनेश्वर)

पर्यटन एवं छुपी हुई जगहें · शृंखला भाग 2
गंगोलीहाट, पिथौरागढ़

गंगोलीहाट
गुफाओं की रहस्यमयी घाटी

एक ऐसी जगह जहां देवी शक्ति का सिद्धपीठ भी है और धरती के 90 फीट नीचे बसी वो गुफा भी, जिसके बारे में कहा जाता है — यहीं छुपा है कलियुग के अंत का रहस्य।

पाताल भुवनेश्वर गुफा, गंगोलीहाट

पाताल भुवनेश्वर गुफा का भीतरी दृश्य

आस्था और रहस्य का संगम

पिथौरागढ़ जिले का गंगोलीहाट कस्बा उत्तराखंड की उन चंद जगहों में से एक है, जहां एक ही यात्रा में आपको देवी की शक्ति और धरती के भीतर छुपी प्रकृति की अनोखी कारीगरी — दोनों एक साथ देखने को मिलती हैं।

यहां का इलाका "गुफाओं वाली घाटी" के नाम से भी जाना जाने लगा है। पौराणिक मानस खंड में इस क्षेत्र की 21 गुफाओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें से अब तक करीब 10 गुफाएं खोजी जा चुकी हैं — पाताल भुवनेश्वर, कोटेश्वर, भोलेश्वर, महेश्वर, लाटेश्वर, मुक्तेश्वर, सप्तेश्वर, डाणेश्वर और भुगतुंग जैसी गुफाएं इसी सिलसिले की कड़ियां हैं।

जिला
पिथौरागढ़
गुफा की गहराई
~90 फीट
कालिका मंदिर से दूरी
~14-16 किमी
स्थापना
आदि शंकराचार्य द्वारा

यहां जरूर देखें

शक्तिपीठ

माँ हाट कालिका मंदिर

देवदार के घने और छायादार वृक्षों से घिरा यह मंदिर सिद्धपीठ माना जाता है। मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य जब बद्रीनाथ-केदारनाथ होते हुए यहां पहुंचे, तो उन्हें यहां किसी दिव्य शक्ति का आभास हुआ — देवी ने कन्या रूप में दर्शन दिए, और इसी स्थान पर माँ हाट कालिका शक्तिपीठ की स्थापना हुई।

नवरात्रों के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

रहस्यमयी गुफा

पाताल भुवनेश्वर

गंगोलीहाट से करीब 14-16 किमी दूर स्थित यह चूना पत्थर की प्राकृतिक गुफा भूमि से लगभग 90 फीट नीचे है। कहते हैं इसे राजा ऋतुपर्ण ने खोजा था। गुफा के भीतर एक हवन कुंड है, जहां जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था — और दीवारों पर उकेरी आकृतियां सदियों पुरानी कथाओं को जीवंत करती हैं।

2022 में इसी क्षेत्र में एक और विशाल गुफा — "महाकालेश्वर" — खोजी गई, जिसे कुछ विशेषज्ञ पाताल भुवनेश्वर से भी बड़ी मानते हैं।

क्या कहती है मान्यता

कहा जाता है कि क्रोध के आवेश में जब भगवान शिव ने गणेश जी का मस्तक अलग किया था, तो उसे उन्होंने इसी गुफा में रखा था। गुफा की दीवारों पर हंस की आकृति उकेरी गई है, जिसे ब्रह्मा जी का वाहन माना जाता है। यहीं एक हज़ार पैरों वाले हाथी की आकृति भी देखने को मिलती है — इसीलिए यह गुफा सिर्फ भूगोल का नहीं, आस्था और पुराणों का भी अनोखा संगम मानी जाती है।

"धरती के भीतर उतरते ही मानो समय खुद थम जाता है — हर मोड़ पर कोई नई कथा दीवारों से झांकती नज़र आती है।"

जाने से पहले जान लें

  • कैसे पहुंचें — निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, वहां से सड़क मार्ग से गंगोलीहाट पहुंचा जा सकता है। पिथौरागढ़ शहर से गंगोलीहाट की दूरी करीब 50-60 किमी है।
  • गुफा में सावधानी — पाताल भुवनेश्वर गुफा के भीतर रास्ता संकरा और फिसलन भरा हो सकता है — आरामदायक जूते और सावधानी ज़रूरी है।
  • साथ जाएं — कालिका मंदिर और गुफा, दोनों एक ही यात्रा में कवर किए जा सकते हैं — सुबह जल्दी निकलना बेहतर रहता है।
  • मौसम — मार्च-जून और सितंबर-नवंबर का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

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